
Gujarat Technological University: गुजरात की सबसे बड़ी सरकारी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी मानी जाने वाली गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (GTU) में स्थापना के 19 साल बीत जाने के बावजूद अब तक स्थायी परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति नहीं हो सकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अब तक तीन बार भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जा चुकी है, लेकिन योग्य और पात्र उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण यह महत्वपूर्ण पद खाली पड़ा है। नतीजतन, पिछले 19 वर्षों से पूरे परीक्षा विभाग का संचालन प्रभारी परीक्षा नियंत्रक के भरोसे किया जा रहा है।
लाखों छात्रों और विशाल परीक्षा व्यवस्था का भार
GTU राज्य की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं में से एक है, जहां हर वर्ष करीब 4 से 5 लाख छात्रों की सेमेस्टर परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए हर सेमेस्टर में 80 से अधिक परीक्षाएं आयोजित करनी पड़ती हैं।
राज्य के अलग-अलग जोन में स्थित कॉलेजों में परीक्षाएं आयोजित किए जाने के कारण अन्य सरकारी विश्वविद्यालयों की तुलना में GTU के परीक्षा विभाग की जिम्मेदारी और कार्यभार काफी व्यापक और महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय की स्थापना के समय से ही इस विभाग में स्थायी अधिकारी का नहीं होना चिंता का विषय बना हुआ है।
इंटरव्यू के बाद भी चयन नहीं हुआ, अब चौथी बार भर्ती
हाल ही में GTU ने विभिन्न टीचिंग और नॉन-टीचिंग पदों पर भर्ती के साथ तीसरी बार परीक्षा नियंत्रक के पद के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की थी। इस दौरान एक योग्य उम्मीदवार का इंटरव्यू भी लिया गया, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका।
इस तरह यह भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विफल हो गई। अब विश्वविद्यालय प्रशासन को इस महत्वपूर्ण पद के लिए चौथी बार नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी।
वेतन स्केल का विवाद और निजी उम्मीदवारों की योग्यता बनी बड़ी बाधा
परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति नहीं हो पाने के पीछे पिछले कई वर्षों से चला आ रहा वेतन स्केल का विवाद प्रमुख कारण माना जा रहा है।
UGC के नियमों के अनुसार इस पद के लिए लेवल-12 के अनुरूप अनुभव की आवश्यकता होती है, लेकिन सरकार की ओर से इस पद के लिए लेवल-11 के अनुसार वेतनमान दिया जा रहा है।
कम वेतनमान के कारण अन्य सरकारी विश्वविद्यालयों में कार्यरत अनुभवी अधिकारी GTU में आने के लिए तैयार नहीं होते। वहीं, दूसरी ओर आवेदन करने वाले निजी विश्वविद्यालयों के उम्मीदवार इतनी बड़ी परीक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी संभालने के लिए पर्याप्त योग्य नहीं पाए जा रहे हैं।
इस तरह वेतन नीति के विवाद और उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिलने के बीच अब तक करीब 4 से 5 प्रभारी परीक्षा नियंत्रक बदले जा चुके हैं। इसके बावजूद GTU की स्थापना के 19 वर्ष बाद भी विश्वविद्यालय को स्थायी परीक्षा नियंत्रक नहीं मिल सका है।



